शीर्षक: स्वयं प्रकाश के कथा-साहित्य में औद्योगिक यांत्रिकता और श्रमिक चेतना का विश्लेषण।
DOI:
https://doi.org/10.71366/ijwos03012641753Keywords:
स्वयं प्रकाश, औद्योगिक परिवेश, श्रमिक चेतना, ईंधन, विस्थापन, यांत्रिकता, मानवीय संवेदना, पूँजीवाद।
Abstract
यह शोध पत्र समकालीन हिंदी कथा-साहित्य के प्रमुख लेखक स्वयं प्रकाश के साहित्य में वर्णित'औद्योगिक परिवेश' व्यापक पहलुओ का सूक्ष्म अध्ययन है। आज के समय में तकनीक और मशीनों को विकास का मुख्य आधार माना जाता है, परंतु स्वयं प्रकाश का साहित्य उस चमक-धमक के पीछे छिपे श्रमिक वर्ग के संघर्ष, उनकी पीड़ा और उनकी 'मानसिक यांत्रिकता' को दुनिया के सामने लाता है। यह शोध इस महत्वपूर्ण तथ्य उजागर करता है, कि कैसे निरंतर बढ़ते मशीनीकरण ने एक हाड़-मांस के इंसान को मशीन के एक 'बेजान पुर्जे' में बदल दिया है। इस शोध का उद्देश्य उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'ईंधन' और चयनित कहानियों के माध्यम से यह समझना है कि पूँजीवादी व्यवस्था के शोषण के विरुद्ध एक मजदूर के भीतर 'श्रमिक चेतना' किस प्रकार जागृत होती है। यह शोध पत्र इंसान और मशीनों के बीच की होड़ ' के उस द्वंद्व को दर्शाता है जिसमें मनुष्य अपनी संवेदनाएँ खोता जा रहा है।
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