भारत में महिला सुरक्षा एवं राजनीतिक अधिकारों का विधिक विश्लेषण: पंचायती राज से नारी शक्ति वंदन अधिनियम तक

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  • डॉ. नम्रता पात्रे Scholar, ISBM University Chhattisgarh
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Keywords:

महिला सुरक्षा कानून, नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023), संवैधानिक अधिकार, भारतीय दंड संहिता (IPC), राजनीतिक प्रतिनिधित्व, घरेलू हिंसा अधिनियम, POSH अधिनियम

Abstract

यह शोध-पत्र भारत में महिलाओं की सुरक्षा एवं उनके राजनीतिक अधिकारों के संवैधानिक व विधिक विकास का एक समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यद्यपि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत महिलाओं को लैंगिक समानता एवं सुरक्षा की गारंटी दी गई है, किंतु व्यावहारिक धरातल पर उनकी सुरक्षा और राजनीतिक सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानूनों की आवश्यकता रही है।
शोध-पत्र में महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित प्रमुख अधिनियमों—जैसे घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम (2005), दहेज निषेध अधिनियम (1961), कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (POSH) अधिनियम (2013)—तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की महत्वपूर्ण धाराओं (जैसे 498A, 306, 354, 228A) का कानूनी अध्ययन किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह लेख राजनीतिक अधिकारों के क्रमिक विकास को रेखांकित करता है, जिसकी शुरुआत 1992 के 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन (स्थानीय निकायों में आरक्षण) से होकर 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 ('नारी शक्ति वंदन अधिनियम') तक पहुँचती है। लेख में संसद एवं राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण के प्रावधानों, उसके क्रियान्वयन से जुड़ी शर्तों (जनगणना और परिसीमन) तथा व्यावहारिक चुनौतियों का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। निष्कर्षतः, यह अध्ययन विधिक साक्षरता और सामाजिक चेतना के माध्यम से महिलाओं की वास्तविक एवं भयमुक्त राजनीतिक भागीदारी पर बल देता है।

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Published

2026-10-18

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[1]
डॉ. नम्रता पात्रे , “भारत में महिला सुरक्षा एवं राजनीतिक अधिकारों का विधिक विश्लेषण: पंचायती राज से नारी शक्ति वंदन अधिनियम तक”, Int. J. Web Multidiscip. Stud. pp. 339-342, 2026-10-18 doi: .