73वाँ संविधान संशोधन एवं ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले का एक विधिक व सामाजिक अध्ययन
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73वाँ संविधान संशोधन, महिला सशक्तिकरण, पंचायती राज, अनुच्छेद 243D, रायपुर जिला, ग्रामीण स्वशासन, प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व (सरपंच-पति)
Abstract
यह शोध-पत्र 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के परिप्रेक्ष्य में ग्रामीण भारत में महिलाओं के राजनीतिक व सामाजिक सशक्तिकरण का विधिक एवं व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहाँ विकेंद्रीकरण को शासन का मूल आधार माना गया है, वहीं ऐतिहासिक रूप से ग्रामीण महिलाएँ निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं से वंचित रही हैं। संविधान के अनुच्छेद 243D के तहत पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए न्यूनतम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की गईं, जिसे छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा बढ़ाकर 50% कर दिया गया है।
प्रस्तुत अध्ययन छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले (विकासखंड—तिल्दा, धरसींवा, आरंग एवं अभनपुर) के विशेष संदर्भ में महिला प्रतिनिधियों की राजनीतिक भागीदारी, प्रशासनिक दक्षता तथा सामाजिक प्राथमिकताओं में आए बदलावों का परीक्षण करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आरक्षण के माध्यम से महिला प्रतिनिधियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल एवं नशाबंदी जैसे बुनियादी सामाजिक मुद्दों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। हालाँकि, 'सरपंच-पति' या प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व, विधिक साक्षरता की कमी और पितृसत्तात्मक दबाव जैसी चुनौतियाँ अभी भी विद्यमान हैं। अंततः, यह लेख महिला प्रतिनिधियों के लिए अनिवार्य प्रशासनिक प्रशिक्षण और विधिक जागरूकता के माध्यम से पंचायती राज में उनकी वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु नीतिगत सुझाव प्रदान करता है।
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