विवेकी राय के कहानी साहित्य में आंचलिकता का स्वरूप

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  • डॉ. वर्षा रानी सहायक प्राध्यापक, द .आई.सी.एफ.ए.आई.विश्वविद्यालय, रायपुर
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संस्कृति, परम्पराएँ, आंचलिकता, ग्रामीण जीवन,सामंतवर्ग, सामाजिक जीवन, राजनितिक जीवन, संस्कार, शिक्षा, रूढिगत व्यवहार, सामन्त वर्ग, संघर्ष

Abstract

विवेकी राय ग्रामीण अंचल से जुड़े कथाकार हैं। इनका जन्म 19 नवम्बर 1924 ई. को गाजीपुर के सोनवानी गाँव में हुआ था । कहानी,उपन्यास,निबंध कविता, संस्मरण आदि सभी विधाओं में इनकी लेखनी अबाध गति से चली । प्रमुख कहानी संग्रह जीवन परिधि,नयी कोयल,अतिथि,कालातीत,गूंगा जहाज आदि हैं । इनकी कहानियों में भोजपुर क्षेत्र की आंचलिक संस्कृति दिखाई देती है| जन्म से ही वे गाँव की संस्कृति से प्रेम कर पोषित करने का प्रयास किया है। अपने जीवन के कुछ समय उन्होंने शहर में बिताया लेकिन उनकी आत्मा गाँव में निवास करती थी। उनके द्वारा गाँव के सुख-दुःख, संघर्ष एवं विभिन्न प्रकार की समस्याओं को उन्होंने जाँचा-परखा और भोगा है। गाँव की अभावपूर्ण जिंदगी की उदासीनता को उन्होंने बहुत ही आत्मिक रूप से देखा है। सामन्त वर्ग, जमींदार वर्ग एवं व्यापारी वर्ग द्वारा किये गये षड्यंत्र एवं कृषक वर्ग के जीवन की सरलता, सहजता एवं भोलेपन का उल्लेख उनकी कहानियों में मिलता है। गाँवों की जनता अशिक्षा एवं रूढिगत व्यवहार, ईश्वर के प्रति अटूट आस्था एवं विश्वास के साथ षड्यंत्रकारी लोगों का शिकार होती है। पंडितों पुरोहितों एवं धर्म के नाम पर अनेक प्रकार की यातनाएं दिखाई देती हैं जिसे सहने के लिए ग्रामीण जनता विवश है।

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Published

2026-09-26

How to Cite

[1]
डॉ. वर्षा रानी , “विवेकी राय के कहानी साहित्य में आंचलिकता का स्वरूप”, Int. J. Web Multidiscip. Stud. pp. 497-501, 2026-09-26 doi: .